किन्नौर कांग्रेस में बगावत: पंचायत चुनाव के बीच अनुशासनहीनता के आरोप में 3 सीनियर नेता 6 साल के लिए निष्कासित

किन्नौर कांग्रेस में बगावत: पंचायत चुनाव के बीच अनुशासनहीनता के आरोप में 3 सीनियर नेता 6 साल के लिए निष्कासित

Rebellion in Kinnaur Congress: Amidst Panchayat Elections

Rebellion in Kinnaur Congress: Amidst Panchayat Elections,

रिकांगपिओ। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर में पंचायत चुनाव के दौरान कांग्रेस संगठन में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। कल्पा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने पार्टी समर्थित प्रत्याशियों के खिलाफ कार्य करने के आरोप में तीन सदस्यों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया है।

ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष विक्रम सिंह नेगी ने कहा है कि संबंधित सदस्यों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और संगठनात्मक अनुशासनहीनता के आरोप पाए हैं। पार्टी की छवि और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 

कार्रवाई पर जताई नाराजगी

दूसरी ओर सापनी पंचायत से प्रधान पद की उम्मीदवार एवं पूर्व पंचायत प्रधान एवं किन्नौर कांग्रेस कमेटी सदस्य रही आशा कुमारी, किन्नौर कांग्रेस कमेटी के सदस्य यशवीर तथा ब्लॉक कांग्रेस कल्पा सचिव धर्म सेन नेगी ने पार्टी की कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जताई है। 

बिना नोटिस के कार्रवाई

नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि बिना किसी शो कॉज नोटिस और बिना उनका पक्ष सुने पार्टी द्वारा लिया गया निर्णय बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने पिछले 40 से 45 वर्षों तक कांग्रेस पार्टी की तन, मन और धन से सेवा की है। उनका परिवार पीढ़ियों से कांग्रेस की विचारधारा के साथ मजबूती से जुड़ा रहा है।

आंख मूंदकर हो रही कार्रवाई

गांव स्तर पर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष व कुछ लोगों की बातों पर आंख मूंदकर कार्रवाई की जा रही है, जबकि वर्षों से पार्टी के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं की भावनाओं और सम्मान की अनदेखी हो रही है। नेताओं ने कहा कि यदि पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की जगह अवसरवादी लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी तो इससे न केवल गांव बल्कि पूरे जिले के समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत होंगी।

...चुनाव लड़ने से रोकना अधिकारों का हनन

इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक हलकों में एक नया विरोधाभास भी चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सार्वजनिक मंचों से यह कह चुके हैं कि पंचायत स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ना सभी का लोकतांत्रिक अधिकार है और उन्हें चुनाव लड़ने से रोकना उनके अधिकारों का हनन होगा।